जीवितराज्यविनाशं करोति मध्ये व्रणः समुत्पन्नः । मध्ये स्फुटितस्त्याज्यो विघ्नकरः पार्श्वयोः स्फुटितः ॥
यदि बनाते हुये मुकुट के मध्य में छिद्र हो जाय तो प्राण-राज्य दोनों का नाश करता है। मध्य में फट जाय तो उसका त्याग कर देना चाहिये तथा दोनों पार्थ में फटा हो तो विप्नकारी होता है।
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