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अध्याय 92 — अथ गवेङ्गिताध्यायः

बृहत्संहिता
3 श्लोक • केवल अनुवाद
दीन गाय राजा को अमंगल करने वाली, अपने पाँवों से पृथ्वी को कुरेदने वाली गाय रोग करने वाली, अश्रूपूर्ण नेत्र वाली गाय स्वामी की मृत्यु करने वाली और डरकर अति शब्द करने वाली गाय चोरों से भय कराने वाली होती है।
यदि विना कारण गाय शब्द करे तो अनर्थ और रात्रि में शब्द करे तो भय करती है। यदि बैल रात्रि में शब्द करे तो मंगलकारी होता है। यदि गाय बहुत मक्खियों से या कुत्ते के बच्चों से घिर जाय तो शीघ्र वृष्टि करती है।
मधुर शब्द करती हुई गाय घर में आये तो गायों की गोष्ठ की वृद्धि के लिये होतो है तथा जल से आई शरीर वाली और रोमाथों से युक्त गाय गोष्ठवृद्धि के लिये धन्य कही गई है। इसी तरह महिषी (भैंस) भी फल देती है।
Krishjan
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