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बृहत्संहिता • अध्याय 92 • श्लोक 3
आगच्छन्त्यो संसेवन्त्यो गोष्ठवृद्धयै गवां आङ्गियो वेश्मवम्भारवेण गाः । प्रहृष्टान वा हृष्टरोम्ण्यः धन्या गावः स्युर्महिष्योऽपि चैवम् ॥
मधुर शब्द करती हुई गाय घर में आये तो गायों की गोष्ठ की वृद्धि के लिये होतो है तथा जल से आई शरीर वाली और रोमाथों से युक्त गाय गोष्ठवृद्धि के लिये धन्य कही गई है। इसी तरह महिषी (भैंस) भी फल देती है।
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