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बृहत्संहिता • अध्याय 92 • श्लोक 2
अकारणे क्रोशति चेदनों भयाय रात्रौ वृषभः शिवाय। भृशं निरुद्धा यदि मक्षिकाभिस्तदाशु वृष्टिं सरमात्मजैर्वा ॥
यदि विना कारण गाय शब्द करे तो अनर्थ और रात्रि में शब्द करे तो भय करती है। यदि बैल रात्रि में शब्द करे तो मंगलकारी होता है। यदि गाय बहुत मक्खियों से या कुत्ते के बच्चों से घिर जाय तो शीघ्र वृष्टि करती है।
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