Krishjan
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अध्याय 91 — अथ मृगचेष्टिताध्यायः
बृहत्संहिता
3 श्लोक • केवल अनुवाद
यदि वन्य मृग गाँव की सीमा में दीप्त शब्द करते हुये स्थित रहें तो साम्प्रतिक, उस सीमा प्रदेश से चले जायें तो भूत और सीमाप्रदेश की तरफ ही आवें तो भविष्य में होने वाले भय को सूचित करते हैं। यदि गाँव के चारो ओर भ्रमण करें तो उस गाँव को शून्य करते हैं।
गाँव को सीमा में आये हुये दीप्त शब्द करने वाले उन मृगों के पीछे ग्रामीण जन्तु शब्द करें तो भय के लिये, वन स्थित अन्य जन्तु शब्द करें तो गाँव के रोधन के लिये तथा वन्य और ग्राम्य दोनों जन्तु मिलकर शब्द करें तो हठपूर्वक खियों के हरण को सूचित करने वाले ये मृग होते हैं।
यदि वन में रहने वाले जीव पुर के द्वार पर स्थित हों तो शत्रुओं से पुर का रोध, गृह के अन्दर प्रवेश करें तो पुर का नाश, गृह में प्रसव करें तो मृत्यु, गृह में रहें तो भय और गृह में प्रवेश करें तो गृहस्वामी का बन्धन होता है।
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