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बृहत्संहिता • अध्याय 91 • श्लोक 2
ते ग्राम्यसत्त्वैरनुवाश्यमाना भयाय रोधायें भवन्ति वन्यैः । द्वाभ्यामपि प्रत्यनुवाशितास्ते वन्दिग्रहायै च मृगा रुवन्ति ॥
गाँव को सीमा में आये हुये दीप्त शब्द करने वाले उन मृगों के पीछे ग्रामीण जन्तु शब्द करें तो भय के लिये, वन स्थित अन्य जन्तु शब्द करें तो गाँव के रोधन के लिये तथा वन्य और ग्राम्य दोनों जन्तु मिलकर शब्द करें तो हठपूर्वक खियों के हरण को सूचित करने वाले ये मृग होते हैं।
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