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बृहत्संहिता • अध्याय 91 • श्लोक 3
वये सत्त्वे द्वारसंस्थे पुरस्य रोधो वाच्यः सम्प्रविष्टे विनाशः । सूते मृत्युः स्याद्भयं संस्थिते च गेहं याते बन्धनं सम्प्रदिष्टम् ॥
यदि वन में रहने वाले जीव पुर के द्वार पर स्थित हों तो शत्रुओं से पुर का रोध, गृह के अन्दर प्रवेश करें तो पुर का नाश, गृह में प्रसव करें तो मृत्यु, गृह में रहें तो भय और गृह में प्रवेश करें तो गृहस्वामी का बन्धन होता है।
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