अध्याय 3 — तृतीयः खण्डः
सुबाल
3 श्लोक • केवल अनुवाद
यह आत्मा प्राण रहित, मुख रहित, श्रोत्र रहित, वाणी रहित, मन रहित, तेज रहित, नेत्र रहित, अनाम, अगोत्र, सिर रहित, बिना हाथ-पैर का, स्नेह रहित, अलोहित (रक्तरहित अथवा रज आदि गुणत्रय रहित) और अप्रमेय है। यह न लम्बा है, न मोटा है, न स्थूल है, न छोटा है, न कम है। यह अपार है, इसे बताया भी नहीं जा सकता। यह अनावृत है, इसके नियम पर तर्क नहीं किया जा सकता, यह अप्रकाश्य है, असंवृत (असंकीर्ण) है, अन्तर-बाह्य रहित है, न वह कुछ खाता है और न कोई उसे खाता है।