Krishjan
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अध्याय 63 — अथ कुक्कुटलक्षणाध्यायः
बृहत्संहिता
3 श्लोक • केवल अनुवाद
जिस मुर्गे के पंख और अंगुलियाँ सीधी हों, ताम्र वर्ण का मुख, नख और चोटी हो, सफेद वर्ण हो, जो रात्रि के अन्त में अच्छे स्वर से बोलता हो, ऐसा मुर्गा राजा, राज्य और घोड़ों की वृद्धि करता है।
जिस मुर्गे का कण्ठ जी के समान हो, पके हुये बैर के समान वर्ण हो, बड़ा शिर हो और सफेद, पीला, साल, काला आदि अनेक वर्षों से युत हो तो ऐसा मुर्गा युद्ध में शुभ होता है तथा शहद या प्रमर के समान वर्ण वाला मुर्गा भी युद्ध में विजय प्राप्त कराने वाला होता है। इससे भिन्न वर्ण वाला, दुर्बल शरीर वाला, मन्द शब्द करने वाला और लंगड़ा मुर्गा अशुभ होता है।
जो मुर्गी कोमल और सुन्दर शब्द करने वाली हो, स्निग्ध शरीर वाली हो और सुन्दर हो, वह राजाओं को चिरकालपर्यन्त लक्ष्मी, यश, विजय, बल और सम्पत्ति प्रदान करती है।
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