मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें

अध्याय 6 — लंकाकाण्ड

बरवै रामायण
1 श्लोक • केवल अनुवाद
श्रीलक्ष्मणजी के साथ (वानर-भालुओं की) नाना प्रकार की सेना शोभा पा रही है। (वह इतनी विशाल है कि दूसरें समुद्र के समान प्रतीत होती है) किंतु (जिसमें लक्ष्मण के रूप में साक्षात्‌ भगवान् अनन्त विराजमान थे और जो स्वयं भगवान्‌ श्रीराम की सेना थी) उसे (प्राकृत) समुद्र के समान कौन कहे। (समुद्र तो ससीम है, असीम भगवान् ‌की सेना भी असीम ही होनी चाहिये)।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें