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बरवै रामायण • अध्याय 6 • श्लोक 1
बिबिध बाहिनी बिलसति सहित अनंद। जलधि सरिस को कहै राम भगवंत॥
श्रीलक्ष्मणजी के साथ (वानर-भालुओं की) नाना प्रकार की सेना शोभा पा रही है। (वह इतनी विशाल है कि दूसरें समुद्र के समान प्रतीत होती है) किंतु (जिसमें लक्ष्मण के रूप में साक्षात्‌ भगवान् अनन्त विराजमान थे और जो स्वयं भगवान्‌ श्रीराम की सेना थी) उसे (प्राकृत) समुद्र के समान कौन कहे। (समुद्र तो ससीम है, असीम भगवान् ‌की सेना भी असीम ही होनी चाहिये)।
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