यके अस्पे शाइस्तए यक हज़ार ।
बिया ता बिगीरी व मन ई दियार ॥
एक हज़ार घोड़ों में से चुनकर एक घोड़ा (ले), (और उसके साथ) आ, ताकि तू मुझसे यह देश (पंजाब) जीत ले।
गुरुजी का अभिप्राय है कि तू जीतने की इच्छा रखता है तो अश्वमेध यज्ञ की तरह अपना घोड़ा इधर भेज दे और धर्मयुद्ध के द्वारा मुझसे यह देश जीत ले। यह क्या कि पन्नों और जबानी सन्देशों के द्वारा शान्ति की बात करता है और छुपकर घात करता है।
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