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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 83
न जर्रा दर ई राहे खतरा तुरास्त | हमा कौम बैराड हुक्मे भरास्त ॥
तेरे लिये इस राह में (मुभसे मिलने के लिये काँगड़ा में आने में) कणमात्र भी ख़तरा नहीं है। (क्योंकि) सारी बैराड़ जाति मेरी आज्ञा में है।
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