जो (तेरे) क़ाज़ी ने मुझे कहा है उससे मैं बाहर नहीं हूँ। यदि तू सच्चा है तो (यहां) स्वयं आ।
(इससे ज्ञात होता है कि औरंगज़ेब ने अपना क़ाजी गुरुजी के पास भेजा था)
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