हर ऑ कस कि ईमाँ परस्ती कुनद ।
न पैमाँ खुदश पेशो पस्ती कुनद ॥
हर वह आदमी जो अपने ईमान (धर्मविश्वास) की पूजा करता है। (वह) अपनी प्रतिज्ञा में आगा पीछा नहीं करता।
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