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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 7
तसेवीहत अज़ सुबह ओ रिश्ता वेश । किज़ाँ दानासाज़ी व जाँ दामे खेश ॥
तेरी माला मनका और डोरा से ज्यादा है। क्योंकि उससे (दाने से) तू दाना डालता है और उससे (डोरे से) अपना जाल फैलाता है। भावार्थ - तू जो भजन करने का ढोंग करता है वह इसलिये है कि लोग तुझ पर विश्वास कर लें और तू उन्हें फाँस ले।
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