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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 64
दिगर शोरिशे कैबरे कीनाकोश । जि मरदाने मर्दा बरू रफ़्त होश ॥
इसके उपरान्त प्रतिहिंसा की कोशिश करने वाले धनुर्धरों ने (ऐसा) कोलाहल किया कि मर्दों के भी मर्दों के होश भूल गये।
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