चु दीदम कि नाहर वयामद बजंग ।
चशीदन् यके तीरे मन बेदिरंग ॥
जब मैंने (तेरे सेनापति) नाहरखाँ को युद्ध के लिये आते देखा तो उसने तुरन्त ही मेरे एक तीर का मज़ा चखा।
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