कि बेरू ने आयद कसे जाँ हिसार ।
न ख़ुर्दन्द तीरों न गश्तन्दों ख़्वार ॥
जो कोई भी उस किले से बाहर नहीं आया, उसने न तीर खाया और न वह अपमानित हुआ।
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