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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 43
व मसहफ़ कसम खुफिया गर ख़ुर्दमे । न यक गाम हम पेश अज़ाँ बुर्दमे ॥
यदि मैं गुप्त रूप से भी धर्म की शपथ खाता तो मैं उससे एक क़दम भी आगे पीछे नहीं रखता। गुरुजी का संकेत आनन्दपुर साहब तथा चमकौर साहब पर मुगलों के आक्रमण के समय धर्म की कसम खाने और उसको तोड़कर पुन: हमला कर देने को ओर है।
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