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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 42
कसे पुश्त उफ़्तद पसे शेर नर। न गीरद बुज़ो मेशों आहू गुज़र ॥
(यदि) कोई शेर नर को पुश्त के पीछे रखता है तो उस राहगुज़र-मार्ग को बकरा, भेड़, हिरन आदि नहीं पकड़ते। गुरुजी का अभिप्राय है कि मेरी पीठ पर खालसा रूपी सिंह का पृष्ठबल है। मेरी तरफ़ मुगल सेना रूपी, भेड़, बकरे, हिरन आदि को भेजने का साहस मत करना।
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