कसे कौले कुर॒आँ कुनद ऐतवार ।
हमाँ रोगे आखिर शब्द ज़ारों ख़्यार ॥
जो कोई तेरी कुरान की क़सम का ऐतबार करे (गा), वह भी अन्तिम दिन (मृत्यु के दिन अथवा क़यामत के दिन) में दु:खी और अपमानित हो (गा)।
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