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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 39
न क़तरा मरा ऐतबारे बरूस्त । कि बख्शी वो दीवाँ हमाँ किज़्य गोस्त ॥
मुझे उस शपथ पर विन्दु भर भी विश्वास नहीं है। क्योंकि तेरे बख्शी (दानाध्यक्ष) और दीवान (आदि पदाधिकारो) जो मेरे पास तेरा सन्देशा लेकर आये थे) सभी झूठ बोलने वाले हैं।
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