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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 37
गुजारिन्द ए कारे आलम कबीर । शनासिन्द ए इल्म आलिम अमीर ॥
वह दुनियाँ के कामों को पूरा करने वाला है, महान्‌ है। समस्त विद्याओं का ज्ञाता है, विद्वान है और विश्व नायक है। उक्त प्रार्थनाओं में हमें गुरुजी के भक्त हृदय के दर्शन होते हैं। इनमें यत्र तत्न प्रभु के गुणों को दोहराया गया है। इसमें प्रभु भक्ति और भक्ति-तन्मयता ही कारण समझना चाहिये। पुनरुक्ति दोष की आशंका नहीं करनी चाहिये क्योंकि भगवान के नाम स्मरणा में पुनरुक्ति दोष नहीं होता। इसके उपरान्त पुन: गुरुजी औरंगजेब को उसकी शपथ तोड़ने के लिये धिक्‍कार देते हैं।
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