तो अज़ नाजों नेमत समर खुर्दई ।
जे जंगी जवानाँ न वर खुर्दई ॥
तूने लाड़ चाव से (बिना मेहनत किये, बिना कष्ट उठाये) फल खाये है (दूसरों की मेहनत के)। योद्धा पुरुषों से (लड़कर) तूने फल (मजा) नहीं चखा।
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