बिबीं गर्दिशे बेवफ़ाए जमाँ ।
कि बर हर बिगुज़रद मकीनों मकाँ ॥
ज़माने (समय) की बेवफ़ाई का चक्कर देख कि हर एक पर (समय समय पर) जीव (गृही) और देह (गृह) बदलते जाते हैं।
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