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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 13
बरीं सू चूँ अकनू निगाहत रबद । कि आँ तल्खिओ तिश्नगीयत रबद ॥
इस दिशा (पंजाब) की ओर जब तेरी निगाह पड़ती है तो वह कड़वाहट और असफलता तुझे भूल जाती है।
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