मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 127
तु गाफ़िल मशौ जीं सिपज्जी सरा । कि आलम बिगुज़रद सरे जा बजा ॥
इस नाशवान सराय (रूपी दुनियाँ) से तू ग़ाफ़िल (प्रमत्त) मत हो क्योंकि जगत निरन्तर गुजरता जा रहा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ज़फ़रनामा के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ज़फ़रनामा के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें