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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 126
कि ऊ रा ग़रूरस्त बर मुल्कों माल । ब मारा पनाहस्त यज़्दाँ अकाल ॥
कि उसको देश (पर शासन करने) का और धन का गर्व है। मेरे साथ अकाल पुरुष की शरणा है।
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