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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 120
उदू रा चूँ कोर ऊ कुनद वक्ते कार | यतीमाँ बरूँ बुर्द बे ज़ख्मे खार ॥
दुश्मन के लिये उसने काम (संकट) के समय अंधेरा किया और यतीमों (अनाथों - जिनका कोई रक्षक नहीं था। अपने और अपने पाँच सिक्‍खों की ओर इशारा है) को कांटे का भी ज़ख्म लगे बिना वह बाहर ले आया।
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