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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 119
रिहाई दिहो रहनुमाई दिंहद । ज़बाँ रा सिफ़त आशनाई दिहद ।।
उसने (मुझे) रिहाई (मुक्ति) दी (उसने मुझे) मार्ग दिखाया और मेरी जिहा को गुणगान की सामर्थ दी।
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