चि दुश्मन कुनद महरबानस्त दोस्त ।
कि बख्शिन्दगी कारे बख्शिन्दा ऊस्त ॥
अगर दोस्त (परमात्मा) महरबान हो तो दुश्मन क्या कर सकता है। क्योंकि दानशीलता, उदारता उस उदार दाता का काम है ।
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