मनम् कुश्ते अम कोहियाँ पुर फ़ितन ।
कि आँ बुत परस्तन्दों मन बुत शिकन ॥
मैंने धूर्त पहाड़ी राजाओं (केसरी चन्द, अजमेरी चन्द, हरि चन्द आ्रादि) को मारा है। वे दिल्ली के देवता के पूजक थे और में उस प्रतिमा का भंजक हूँ।
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