वह रूप में सोन्दर्य है, ज्योतित हृदय वाला है। वह देशों का स्वामी है, स्वामी हैं ओर प्रभु है।
(यहाँ गुरुजी का अभिप्राय है कि जेसा तू अपने आपको शाहों का शाह और चतुर तथा स्थिति का नियामक मानता है, हे औरंगज़ेब तू नहीं, बल्कि परमात्मा ही सब कुछ है, उसी की छवि से सुन्दर व्यक्ति रूपमान हैं, वही पृथ्वी का स्वामी है और वहीं एक मालिक ऐसा है जो नमस्य है। तू जो अपने आपको शाहानेशाह आदि मानता है वह ग़लत है।)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ज़फ़रनामा के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
ज़फ़रनामा के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।