कि हरगिज़ अज्ञाँ चार दीवारे शूम |
निशानी न मानद वरीं पाक बूम ॥
कि हरगिज़ इस अशुभ चारदीवारी (मुगल शासन रूपी भवन की चारदीवारी) का इस पवित्र (भारत) भूमि पर चिन्ह भी न रह जाय।
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