ऐ औरंगजेब! तू शाहों का शाह (अपने को मानकर) खुश है। और (अपने को) चालाक दस्त (दक्षपाणि) तथा सुयोग्य चाबुक सवार (जो शासन पर दृढ़ता से दण्ड के द्वारा शासन करता हो) (समझता) है।
यहाँ जिन गुणों की चर्चा अथवा आरोप है उनका कथन - “तू ऐसा वास्तव में है नहीं” यह बताने के लिये किया गया है। इसके बाद गुरुजी पुन: ईश्वर के गुणगान में प्रवत्त हुए। आगे के चार शेरों में गुरुजी ने ईश्वर की अपने ऊपर कृपा का वर्णन किया है और भक्तितन्मय हृदय से उसकी महिमा का गान किया है। यहाँ ईश्वर के स्तवन में बार बार पुनरुक्ति हुई है लेकिन प्रभु कीर्तन में पुनरुक्ति दोष नहीं मानना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ज़फ़रनामा के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
ज़फ़रनामा के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।