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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 107
शनासद हमी तो बयज़्दाँ करीम । न ख़्वाहद ह्मी तो बदौलत अज़ीम ॥
यदि तू भगवान को कृपालु जानता तो तू इस प्रकार शासन से बड़प्पन नहीं चाहता।
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