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ज़फ़रनामा • अध्याय 1 • श्लोक 102
कि दर बारगाहत मनायम शुमा । बज़ाँ रोज़ बाशी तु शाहिद हुमों ॥
तेरी राज्य सभा में (तेरे शपथपूर्वक निमंत्रण के अनुसार) जब से मैं तेरे पास आऊं, उसी दिन से तू इस प्रकार साक्षी होगा। (अर्थात यदि मैं दरबार में आऊं और मेरे साथ धोखा हुआ तो क़यामत के दिन तू साक्षी होगा कि यह व्यक्ति मेरे विश्वास के कारण संकट में पड़ा।)
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