मन अकनू व अफ़ज़ाले पुरुषे अकाल ।
कुनम जाबे आहन चुनाँ वर्शगाल ॥
मैं अब अकाल पुरुष की कृपा से लोहे के पानी से (चमकीले हथियारों से) ऐसी वर्षा करुंगा:--
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