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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 99
शुद्धस्फटिकसंकाशं धृतबालेन्दुमौलिनम्। पञ्चवक्त्रयुतं सौम्यं दशबाहुं त्रिलोचनम् ॥
वे भगवान् शिव परम पवित्र स्फटिक के सदृश निर्मल हैं, बालरूप चन्द्रमा को मस्तक में धारण किये हुए हैं, पाँच मुखों से युक्त, सौम्य, दश भुजा एवं तीन नेत्रों से युक्त हैं।
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