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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 98
आकाशे वायुमारोप्य हकारोपरि शंकरम्। बिन्दुरूपं महादेवं व्योमाकारं सदाशिवम् ॥
इस आकाश तत्त्व में वायु का आरोपण करके 'ह' कार के ऊपर भगवान् शंकर (का ध्यान करे), जो बिन्दु रूप महादेव हैं। वही व्योमाकार में सदाशिव रूप हैं।
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