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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 94
आहृदयाद्‌ध्रुवोर्मध्यं वायुस्थानं प्रकीर्तितम् । वायुः षट्‌कोणकं कृष्णं यकाराक्षरभासुरम् ॥
हृदय क्षेत्र से भृकुटियों तक का स्थान वायु का क्षेत्र कहा गया है, यह षट्‌कोण के आकार वाला, कृष्ण वर्ण से युक्त भास्वर 'य' अक्षर वाला होता है।
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