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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 92
त्रियक्षं वरदं रुद्रं तरुणादित्यसंनिभम् । भस्मोद्धूलितसर्वाङ्गं सुप्रसन्नमनुस्मरन् ॥
त्रियक्ष (तीन नेत्रों) से युक्त वर प्रदान करने वाले, तरुण आदित्य के सदृश प्रकाशमान तथा संमस्त अङ्गों में भस्म धारण किये हुए भगवान् रुद्र का प्रसन्न मन से सदा ध्यान करना चाहिए।
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