वह्निस्विकोणं रक्तं च रेफाक्षरसमुद्भवम् ।
वहाँ चानिलमारोप्य रेफाक्षरसमुज्वलम् ॥
तीन कोणों से युक्त अग्नि, लाल रंग वाला एवं 'र' कार से संयुक्त होता है। अग्नि में वायु को आरोपित करके उस समुज्ज्वल 'र' कार को समन्वित करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगतत्त्व के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
योगतत्त्व के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।