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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 90
ततो जलाद्भयं नास्ति जले मृत्युर्न विद्यते। आपायोहृदयान्तं च वह्निस्थानं प्रकीर्तितम् ॥
इसके पश्चात् उस योगी को जल से किसी भी तरह का डर नहीं रहता और न ही जल से उसकी मृत्यु हो सकती है। जलतत्त्व (गुदा भाग) से हृदय क्षेत्र तक अग्नि का स्थान बताया गया है।
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