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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 84
पादादिजानुपर्यन्तं पृथिवीस्थानमुच्यते। पृथिवी चतुरस्त्रं च पीतवर्णं लवर्णकम् ॥
पैरों से जानु (घुटनों) तक पृथ्वी तत्त्व का स्थान बतलाया गया है। चार कोनों से युक्त यह पृथ्वी, पौत वर्ण, "ल" कार से युक्त कही गयी है।
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