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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 80
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन योगमेव सदाभ्यसेत्। ततः परिचयावस्था जायतेऽभ्यासयोगतः ॥
अतः योगी को निरन्तर प्रयत्नपूर्वक योग का अभ्यास करते रहना चाहिए। तदनन्तर अभ्यास योग से 'परिचय अवस्था' का शुभारम्भ होता है।
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