एवं भवेद्भटावस्था संतताभ्यासयोगतः ।
अनभ्यासवत श्चैव वृथागोष्ठ्या न सिद्धयति ॥
इस प्रकार लगातार योग के अभ्यास से उसे घटावस्था की प्राप्ति हो जाती है; परन्तु इस तरह की सिद्धि अभ्यास के द्वारा ही मिल सकती है, केवल बातों से कुछ भी सिद्ध नहीं हो सकता।
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