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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 77
शिष्याश्च स्वस्वकार्येषु प्रार्थयन्ति न संशयः। तत्तत्कर्मकरव्यग्रः स्वाभ्यासेऽविस्मृतो भवेत् ॥
शिष्य-समुदाय अपने-अपने कार्यों के लिए योगी साधक से निश्चित ही प्रार्थना करेंगे; किन्तु योगी को उन (शिष्यगणों) के काम में पड़कर अपने कर्त्तव्य (अभ्यास) को विस्मृत नहीं कर देना चाहिए।
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