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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 75
एते विघ्ना महासिद्धेर्न रमेत्तेषु बुद्धिमान्। न दर्शयेत्स्वसामर्थ्यं यस्य कस्यापि योगिराट् ॥
(परन्तु) ये सभी सिद्धियाँ योग-सिद्धि के लिए विघ्नरूप हैं, बुद्धिमान् योगी साधक को इन (सिद्धियों) से बचना चाहिए। अपनी इस तरह की सामर्थ्य को कभी भी किसी के समक्ष प्रकट नहीं करना चाहिए।
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